पाकिस्तान से क्रिकेट मैच और गुजरात से व्यापार जारी, पंजाब CM भगवंत मान ने करतारपुर कॉरिडोर खोलने की मांग की

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार पर दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए करतारपुर साहिब कॉरिडोर को तुरंत खोलने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब भारत पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेल सकता है तो करतारपुर यात्रा और व्यापार क्यों नहीं शुरू हो सकता। मान ने केंद्र से कहा कि इसे बिना किसी मांग के स्वतः खोल देना चाहिए था क्योंकि यह सिर्फ धार्मिक यात्रा है जिसमें श्रद्धालु कुछ घंटों के लिए जाकर वापस लौट आते हैं।
शांति और भाईचारे का संदेश
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि करतारपुर कॉरिडोर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि भारत और पाकिस्तान के लोगों के बीच शांति का सेतु है। उन्होंने कहा कि यह वह स्थान है जहां लाखों श्रद्धालु गुरु नानक देव जी के चरणों में मत्था टेकते हैं और उनके उपदेशों से प्रेरणा लेते हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब दोनों देशों को आपसी वैमनस्य छोड़कर शांति और सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।

पाकिस्तान से व्यापार शुरू करने की वकालत
भगवंत मान ने यह भी कहा कि पंजाब के लोगों को रोजगार देने और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पाकिस्तान के साथ व्यापार फिर से शुरू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब गुजरात के रास्ते व्यापार जारी रह सकता है तो पंजाब से क्यों नहीं। व्यापार से न केवल आर्थिक लाभ होगा बल्कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थायी रोजगार भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह पंजाब के लाखों परिवारों के लिए राहत लेकर आएगा।
गुरु पर्व पर पंजाब की प्रार्थना
गुरु पर्व के अवसर पर करतारपुर साहिब पहुंचकर मुख्यमंत्री मान ने गुरु नानक देव जी के चरणों में मत्था टेका। उन्होंने कहा कि पंजाब गुरुओं और शहीदों की भूमि है जहां से हमेशा प्रेम, त्याग और भाईचारे का संदेश दिया गया। उन्होंने अपने परिवार के साथ पंजाब की खुशहाली और शांति की प्रार्थना की और कहा कि गुरु नानक जी के उपदेश आज भी इंसानियत का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
सरकार की सख्त नीति और विवाद
पाहलगाम हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए करतारपुर कॉरिडोर को बंद कर दिया था। सरकार का तर्क था कि “खून और पानी साथ नहीं बह सकते।” इसके बाद दोनों देशों के बीच कई समझौते ठप हो गए। लेकिन अब जब खेल और अन्य स्तरों पर संपर्क बहाल हो रहे हैं तो भगवंत मान का यह बयान नए विमर्श को जन्म दे रहा है कि क्या अब धार्मिक और आर्थिक रास्ते भी फिर से खुलने चाहिए।